Cricket News

Revealed: Why BCCI Didn’t Punish Virat Kohli For Travis Head Handshake Snub

Faizan Ahmed · · 1 min read
Share

आईपीएल में गरमाई बहस: कोहली और हेड का मामला

आईपीएल में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) और सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) के बीच हुए मुकाबले के बाद से ही एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में विराट कोहली और ट्रैविस हेड के बीच की अनबन साफ झलकती है, जिसने फैंस के बीच बड़ी बहस छेड़ दी है। राजीव गांधी इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में SRH की 55 रनों की जीत के बाद सोशल मीडिया पर यह सवाल तेजी से फैल गया कि आखिर बीसीसीआई ने कोहली के खिलाफ कोई सख्त कदम क्यों नहीं उठाया?

मैदान पर क्या हुआ था?

विवाद की शुरुआत तब हुई जब मैच के दौरान कोहली और हेड के बीच शब्दों का आदान-प्रदान हुआ। मैच की दूसरी पारी के दौरान कोहली को मिड-विकेट पर फील्डिंग कर रहे हेड की तरफ इशारा करते हुए देखा गया। बाद में, जब हेड गेंदबाजी करने आए, तो उन्होंने राजत पाटीदार का महत्वपूर्ण विकेट लेकर अपनी उपयोगिता साबित की। इसके बाद भी दोनों खिलाड़ियों के बीच तनाव बना रहा, जो मैच के बाद के दृश्यों में भी साफ दिखाई दिया।

हैंडशेक विवाद: सच्चाई क्या है?

मैच खत्म होने के बाद एक वीडियो क्लिप सामने आई, जिसमें कोहली को बाकी खिलाड़ियों, जैसे पैट कमिंस और अभिषेक शर्मा से मिलते हुए देखा गया, लेकिन ऐसा प्रतीत हुआ कि उन्होंने ट्रैविस हेड को अनदेखा कर दिया। फैंस का मानना है कि यह खेल भावना के विपरीत है। हालांकि, बीसीसीआई और आईपीएल अधिकारियों ने इस मामले पर चुप्पी साधे रखी है और कोई भी आधिकारिक कार्रवाई करने से इनकार कर दिया है।

बीसीसीआई का रुख क्यों नरम है?

एक रिपोर्ट के अनुसार, बीसीसीआई के सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि हैंडशेक करना ‘खेल भावना’ का हिस्सा तो है, लेकिन यह कोई अनिवार्य नियम नहीं है। Times of India के अनुसार, एक बीसीसीआई सूत्र ने कहा, ‘भारत और पाकिस्तान के खिलाड़ी भी कई बार मैच के बाद हाथ नहीं मिलाते हैं, इसलिए इसे अनुशासनात्मक कार्रवाई का आधार नहीं बनाया जा सकता।’ यह स्पष्ट है कि इसे व्यक्तिगत चुनाव माना जा रहा है, न कि किसी कोड ऑफ कंडक्ट का उल्लंघन।

क्रिकेट में अतीत की घटनाएं

यह पहली बार नहीं है जब मैदान पर इस तरह की स्थिति उत्पन्न हुई है। एशिया कप 2025 के दौरान भी ऐसी ही घटनाएं देखने को मिली थीं, जहां भारत और पाकिस्तान के कप्तानों के बीच हैंडशेक की रस्म नहीं निभाई गई थी। भारतीय टीम ने मैच के बाद मैदान से तुरंत निकलना बेहतर समझा था। इन उदाहरणों से यह स्पष्ट होता है कि क्रिकेट में ‘नो-हैंडशेक’ की स्थिति नई नहीं है।

निष्कर्ष: जुनून या अनुशासन?

क्रिकेट एक ऐसा खेल है जो अपने जुनून और तीव्रता के लिए जाना जाता है। मैदान पर होने वाली गहमागहमी को अक्सर खेल के दबाव का हिस्सा माना जाता है। हालांकि फैंस का एक वर्ग कोहली के व्यवहार से निराश हो सकता है, लेकिन आधिकारिक नियमों के अनुसार, बीसीसीआई ने इसे एक निजी मामला मानकर कोई भी कार्रवाई न करने का निर्णय लिया है। अंततः, खेल के मैदान पर होने वाली इन छोटी-मोटी घटनाओं को वहीं खत्म कर देना ही खेल की गरिमा के लिए बेहतर है।

  • मैदान पर होने वाले तनाव खेल का हिस्सा हैं।
  • हैंडशेक अनिवार्य नियम नहीं, बल्कि एक शिष्टाचार है।
  • बीसीसीआई ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी ऐसे मामलों में कार्रवाई नहीं की जाएगी।

खेल के प्रति खिलाड़ियों का जुनून प्रशंसनीय है, लेकिन इसे खेल के नियमों के दायरे में रखना भी उतना ही जरूरी है।

Avatar photo
Faizan Ahmed

Faizan Ahmed focuses on bowling strategies, wicket-taking trends, and economy-rate analysis.