क्या ऋषभ पंत की नाराजगी लखनऊ सुपर जायंट्स के अंदरूनी कलह का संकेत है?
आईपीएल 2026: ऋषभ पंत और एलएसजी के बीच बढ़ती दूरियां
आईपीएल 2026 का सीजन लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा है। कागज पर एक मजबूत टीम होने के बावजूद, मैदान पर टीम का प्रदर्शन लगातार गिरता गया है। हालांकि, चर्चा का असली केंद्र मैदान का प्रदर्शन नहीं, बल्कि कप्तान ऋषभ पंत का बदलता व्यवहार और उनके बयानों में झलकती हताशा है। क्या संजीव गोयनका के स्वामित्व वाली इस टीम में सब कुछ ठीक है? यह सवाल अब क्रिकेट गलियारों में सबसे बड़ा विषय बन चुका है।
लाइव टीवी पर पंत का ‘एफ-बम’ और उसके पीछे का दर्द
राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ जयपुर में मिली हार के बाद ऋषभ पंत का एक बयान सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया। 220 रन बनाने के बावजूद टीम की हार से आहत पंत ने पोस्ट-मैच इंटरव्यू के दौरान ‘एफ-बम’ (अपशब्द) का इस्तेमाल किया। भले ही इयान बिशप ने तुरंत माफी मांगी, लेकिन पंत का यह व्यवहार महज एक दुर्घटना नहीं थी। यह एक ऐसे कप्तान की हताशा थी जो बार-बार यह समझाने से थक चुका है कि उनकी टीम क्यों नहीं जीत पा रही है। उन्होंने कहा, ‘हम अपनी टीम पर गर्व करते हैं। भले ही नतीजे हमारे पक्ष में नहीं रहे, लेकिन इससे यह तथ्य नहीं बदल जाता कि हम एक बेहतरीन टीम हैं।’
एलएसजी में ‘बहुत ज्यादा दिमाग’ का खेल
ऋषभ पंत के बयानों में एक बात स्पष्ट रूप से उभर कर आती है—एलएसजी के ड्रेसिंग रूम में बहुत सारे लोग अपनी राय थोप रहे हैं। एलएसजी का सपोर्ट स्टाफ काफी बड़ा है, जिसमें टॉम मूडी (क्रिकेट निदेशक), जस्टिन लैंगर (हेड कोच), केन विलियमसन (रणनीतिक सलाहकार) और भरत अरुण जैसे दिग्गज नाम शामिल हैं। पंत ने कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाफ मिली हार के बाद स्वीकार किया था कि मैदान पर ‘बहुत ज्यादा दिमाग’ होना फैसला लेने की प्रक्रिया को कठिन बना देता है।
रणनीति और फैसलों में कप्तान की बेबसी
चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ मैच के दौरान एक अजीब वाकया देखने को मिला, जहां कप्तान पंत खुद बल्लेबाजी करने नहीं आए। उन्होंने बाद में स्वीकार किया कि यह फैसला पूरी तरह से उनका नहीं था। उन्होंने कहा, ‘कभी-कभी जब टीम प्रबंधन का विचार अलग हो, तो उसे लागू करना मुश्किल होता है। यह हताशा भरा है जब आप जानते हैं कि आपकी टीम में क्या क्षमता है, लेकिन विचारों के टकराव के कारण आप उसे लागू नहीं कर पाते।’
संजीव गोयनका की भागीदारी पर सवाल
मैदान पर ऋषभ पंत और टीम के मालिक संजीव गोयनका के बीच हुई तीखी बहसें भी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी रही हैं। जब एक कप्तान बार-बार ‘थॉट प्रोसेस’ और ‘मैनेजमेंट के सम्मान’ की बात करता है, तो यह स्पष्ट संकेत है कि ड्रेसिंग रूम के अंदर सत्ता का संघर्ष चल रहा है। एलएसजी ने पूरे सीजन में लगातार बैटिंग ऑर्डर और बॉलिंग कॉम्बिनेशन बदले हैं, जिससे यह साफ होता है कि टीम किसी एक स्पष्ट रणनीति पर सहमत नहीं है।
निष्कर्ष: क्या ऋषभ पंत एलएसजी से बाहर निकलने का मन बना चुके हैं?
ऋषभ पंत की भावुकता और उनका अक्सर थका हुआ दिखना इस बात का संकेत है कि वह एलएसजी के मौजूदा सेटअप में खुद को बंधा हुआ महसूस कर रहे हैं। जिस तरह से टीम के फैसलों में उन्हें दरकिनार किया गया है या उनके विचारों को ‘थिंक टैंक’ द्वारा बदला गया है, उसने कप्तान और प्रबंधन के बीच एक बड़ी खाई पैदा कर दी है। यदि एलएसजी को भविष्य में बेहतर करना है, तो उन्हें टीम के भीतर चल रहे इस वैचारिक मतभेद को सुलझाना होगा, वरना यह हताशा टीम की नींव को और कमजोर करती रहेगी।
