Former Indian legend backs Rishabh Pant after LSG skipper dropped F-Bomb on live
आईपीएल 2026 में लखनऊ सुपर जायंट्स का निराशाजनक प्रदर्शन
इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 का सीजन लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) के लिए बेहद निराशाजनक रहा। ऋषभ पंत की कप्तानी वाली यह टीम अंक तालिका में सबसे निचले पायदान पर रही। टीम ने 14 मैचों में मात्र आठ अंक हासिल किए, जिससे खिलाड़ी और प्रबंधन दोनों ही भारी दबाव में थे। इस खराब फॉर्म के बीच एक विवाद ने उस समय तूल पकड़ लिया जब राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ मैच के बाद लाइव टीवी पर ऋषभ पंत ने एक अभद्र शब्द (F-Bomb) का इस्तेमाल किया।
लाइव टीवी पर क्या हुआ?
वेस्टइंडीज के पूर्व तेज गेंदबाज इयान बिशप जब मैच के बाद ऋषभ पंत का इंटरव्यू ले रहे थे, तब उन्होंने टीम के खराब प्रदर्शन को लेकर सवाल किया। 28 वर्षीय पंत ने अपना आपा खोते हुए कहा, ‘जो कुछ भी हुआ उसके बावजूद, हम एक अच्छी टीम हैं। इस सीजन चीजें हमारे पक्ष में नहीं रहीं, लेकिन यह तथ्य नहीं बदल सकता कि हम एक बहुत ही अच्छी टीम हैं।’ इस घटना के बाद इयान बिशप को ब्रॉडकास्ट के दौरान दर्शकों से माफी मांगनी पड़ी।
सुनील गावस्कर का समर्थन
इस विवाद के बाद भारतीय क्रिकेट के दिग्गज और पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर ने ‘मिड-डे’ के अपने लेख में ऋषभ पंत का बचाव किया है। 76 वर्षीय गावस्कर ने तर्क दिया कि मैच खत्म होने के तुरंत बाद हारने वाली टीम के कप्तान का इंटरव्यू लेना कितना उचित है, इस पर फिर से विचार करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, ‘एक विकेटकीपर के तौर पर पंत चिलचिलाती गर्मी में मैदान पर घंटों भागदौड़ करते हैं, जिससे थकान और हताशा स्वाभाविक है। ऐसे में उनसे तुरंत तीखे सवाल पूछना उन्हें उकसाने जैसा है।’
क्या खिलाड़ियों को थोड़ा समय मिलना चाहिए?
गावस्कर ने ऋषभ पंत को एक हंसमुख और क्रिकेट प्रेमी खिलाड़ी बताते हुए कहा कि आमतौर पर शांत रहने वाले पंत का ऐसा व्यवहार यह दर्शाता है कि हार का दबाव कितना अधिक होता है। उन्होंने सुझाव दिया कि ब्रॉडकास्टर्स को हारने वाले कप्तान के बजाय ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ का इंटरव्यू लेने पर ध्यान देना चाहिए। इससे कप्तानों को खुद को शांत करने और मैच के विश्लेषण पर ध्यान केंद्रित करने का पर्याप्त समय मिल सकेगा।
भविष्य के लिए एक सबक
पूर्व भारतीय दिग्गज के इस सुझाव को क्रिकेट जगत में काफी गंभीरता से लिया जा रहा है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि मैदान पर कड़ी प्रतिस्पर्धा और गर्मी के बीच खिलाड़ियों का मानसिक स्वास्थ्य सर्वोपरि है। यदि प्रसारणकर्ता खिलाड़ियों को थोड़ा ठंडा होने का समय देते हैं, तो ऐसे विवादों को भविष्य में आसानी से टाला जा सकता है। ऋषभ पंत, जो अपनी आक्रामक शैली के लिए जाने जाते हैं, निश्चित रूप से इस सीजन से मिले कठिन अनुभवों से आगे बढ़ना चाहेंगे।
निष्कर्ष
खेल भावना केवल मैदान पर नहीं, बल्कि मैदान के बाहर भी बनी रहनी चाहिए। सुनील गावस्कर जैसे दिग्गजों का समर्थन यह साबित करता है कि खेल में मानवीय गलतियों को समझने और उन्हें सुधारने की गुंजाइश होनी चाहिए। ऋषभ पंत के लिए यह एक कठिन समय हो सकता है, लेकिन क्रिकेट के जानकारों की राय उनके खेल के प्रति जुनून और उनकी ईमानदारी की सराहना ही करती है। आने वाले समय में देखना दिलचस्प होगा कि क्या बीसीसीआई और प्रसारणकर्ता इन सुझावों को अपनाते हैं या नहीं।
